Visitors online: 003

नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस - 26 जून

Home » Knowlege Box

प्रतिवर्ष 26 जून को पूरे विश्व में मादक पदार्थ निरोधक दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ की मादक पदार्थ व अपराध निरोधक संस्था की ओर से 26 जून को पूरी दुनिया में विश्व मादक पदार्थ निरोधक दिवस मनाने की अपील की गयी है। इस दिन मादक पदार्थ से संघर्ष के क्षेत्र में पायी जाने वाली चुनौतियों को दूर करने और इस संबंध में सही उपाय किए जाने पर चर्चा की जाती है। इस वर्ष पूरी दुनिया के लोग विश्व मादक पदार्थ दिवस को “आशा जनक संदेशः नशे की लत बचाव और उपचार योग्य” के नारे से मानने के लिए एकत्रित हुए हैं ताकि मादक पदार्थों से ख़तरों से दुनिया को जागरूक करें। आंकड़े इस बात के सूचक हैं कि विश्व समुदाय के निरंतर प्रयासों के बावजूद मादक पदार्थों की समस्या यथावत समाज के कल्याण विशेषकर युवावर्ग के लिए गंभीर ख़तरा समझी जाती है। इस संबंध में एक विशेष कार्यक्रम के साथ आपकी सेवा में उपस्थित हैं, कृपया हमारे साथ रहिए।

 

 

जो वस्तु मादक पदार्थों से संघर्ष के विश्व दिवस के महत्त्व को उजागर करती है, वह मादक पदार्थों की प्रवृत्ति और उसका समाज पर पड़ने वाला बुरा प्रभाव है। नशे की लत एक सामाजिक बीमारी होने के साथ साथ मानसिक व शारीरिक बीमारी भी है जिसके कारण बहुत से देशों को भारी नुक़सान उठना पड़ता है। इस प्रकार से हम नशे की लत को समाजिक व आर्थिक समस्या कहा जा सकता है जिसके भीषण प्रभाव मानव समाज को खोखला कर देते हैं क्योंकि नशे की लत, विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक विकास में बाधा का कारण बनता है और इसके विध्वंसक परिणाम समाजिक अपराध के विस्तार सहित नैतिक व सांस्कृतिक पतन के रूप में सामने आता है।

नशा क्या है ?

 

नशा ऐसी बीमारी है जो हमें,हमारे समाज को ,हमारे देश को तेजी से निगलते जा रही है आज शहर और गावों में पढ़ने खेलने की उम्र में स्कूल और कॉलेज के बच्चे एवं युवा वर्ग मादक पदार्थों के बाहुपाश में जकड़ते जा रहे हैं ल इस बुराई के कुछ हद तक जिम्मेदार हम लोग भी हैं हम अपने काम धंधों में इतना उलझ गए हैं कि हमें फुर्सत ही नहीं है ये जानने की कि हमारा बच्चा कहाँ जा रहा है, क्या कर रहा है कोई परवाह नहीं,बस बच्चों की मांगे पूरी करना ही अपनी जिम्मेदारी समझ बैठे हैं l

 

बदलती हुई सामाजिक मान्यताएं, कुछ नया करने की चाहत, तरह-तरह के तनाव आदि तमाम ऐेसे कारण हैं, जिनकी वजह से समाज में नशे का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसके श‍िकार में युवा वर्ग का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। युवाओं में नशे की शुरूआत आमतौर से स्कूल के अंदर मीठी सुपारी और सादे मसाले से होती है, जो धीरे-धीरे तम्बाकू युक्त गुटखा और सिगरेट से होती हुई नशीली दवाओं तक जा पहुंचती है। साथियों के दबाव अथवा सामाजिक चक्रव्‍यूहों में फंसे बच्‍चे जब एक बार इनकी गिरफ्त में आ जाते हैं, तो उन्हें इस दलदल से निकालना बेहद दुष्कर हो जाता है। लेकिन यदि अभ‍िभावक बच्चों पर बराबर नजर रखें और उनकी गतिविध‍ियों का अध्ययन करते रहें, तो उनके व्यवहार और चाल-ढ़ाल को देखकर इस बीमारी को शुरू में ही पकड़ा जा सकता है।

कोई इंसान मादक पदार्थों के नशे की लत में कैसे फंस जाता है यह दूसरों के लिए समझना मुश्किल होता है। नशाखोरी कोई जन्मजात बीमारी नहीं होती या घरेलू संस्कार ही इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। यह सोच भी गलत है कि नशा करने वाले अपनी मर्जी से जब चाहे नशा करना छोड़ सकते हैं। दरअसल नशे की लत ऐसी बीमारी है जिसे इलाज से ठीक किया जा सकता है।  नशे की लत में मुब्तिला होने के कई कारण हैं लेकिन पढ़ाई में पिछड़ जाना, प्यार में असफल हो जाना, नौकरी छूट जाना, परिवार से सहानुभूति अथवा प्यार न मिल पाना, बचपन में शोषण के शिकार हो जाना तथा पारिवारिक कलह ऐसी समस्याएं हैं जिनकी वजह से कोई इंसान नशे की लत में फंस जाता है।

 

कुछ लोग कई प्रकार के अलौकिक व आध्यात्मिक अनुभव के लिए भी इनका सेवन करते हैं, जैसे-साधू, सन्यासी इत्यादि।

चूँकि इन मादक द्रव्यों का प्रभाव थोड़े समय तक ही रहता है इसलिए लोग इनके बार-बार सेवन के लिए विवश हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त लम्बे समय तक लगातार सेवन के बाद व्यक्ति चाह कर भी इनका सेवन नहीं रोक पाता है क्योंकि इनका सेवन बंद करते ही विभिन्न प्रकार के कष्टदायक मानसिक व शारीरिक लक्षण उत्पन्न होते हैं जो दुबारा सेवन करने से ठीक होते हैं। इस प्रकार से भी व्यक्ति लगातार इसके सेवन के लिए विवश हो जाता है और धीरे-धीरे वह इसके शिकंजे में फँस कर इनका आदी बन जाता है।

नशे की प्रमुख चार अवस्थायें

 

प्रारम्भिक अवस्था या प्रयोगात्मक अवस्था - जब कोई भी व्यक्ति मादक पदार्थों की ओर आकर्षित होकर प्रथम बार उसको सेवन करता है वह इसी भ्रम में रहता है कि मैं तो सिर्फ शौक के लिये इसका सेवन कर रहा हूँ तथा मै जब चाहूँ इसको बन्द (छोड़) कर सकता हूँ।

कभी-कभी प्रयोग – जब सेवनकर्ता प्रयोगात्मक अवस्था को बार-बार दोहराता है तो उसका शरीर लगातार मादक पदार्थों की मांग करता है प्रयोगकर्ता अनियमित रूप से विभिन्न अवसरों पर संकोच छोड़कर प्रयोग करता है तथा उसकी झिझक खत्म हो जाती है वह मादक पदार्थों के प्रयोग में अपने-आपको ऊर्जावान-हल्का-फुल्का महसूस करता है।

आदी हो जाना- कुछ ही समय बाद नशा करने वाला व्यक्ति नशीले पदार्थों को दैनिक या दिन में कई बार लेना शुरू करता है अगर वह नियत अन्तराल या समय पर नशीला पदार्थ नहीं लेता तो उसके अन्दर बैचेनी, अवसाद, शरीर टूटना, बुखार इत्यादि लक्षण (विदड्राल सिम्पटम्स) उभरते हैं जिससे वह किसी भी कीमत पर नशे को प्राप्त करता है तथा नशे को प्राप्त करने के लिये कोई भी कार्य यहां तक झूठ बोलना, चोरी करना, यहां तक कि किसी के प्रति हत्या तक का जघन्य कृत्य कर सकता है।

 

नशीली दवाओं के प्रमुख लक्षण

 

नशीली दवाओं के शिकार व्‍यक्तियों की सबसे बड़ी पहचान यही है कि उनकी सामान्‍य दिनचर्या पूरी तरह से ध्‍वस्‍त हो जाती है। उन्‍हें सभी कार्यों में अरूचि हो जाती है। घर/परिवार के सदस्‍यों से दूर-दूर रहना, अन्‍तर्मुखी हो जाना, विद्यालय या कॉलेज से अनुपस्थिति रहना तथा एकांत स्‍थान पर लम्‍बे समय तक बैठे रहना तथा बात-बात पर गुस्‍सा करना तथा हर समय झगड़े पर उतारू हो जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

 

नशीली दवाओं के लती लोगों के आत्‍मविश्‍वास में बेहद कमी आ जाती है। वे साफ-सफाई के प्रति बेहद लापरवाह हो जाते हैं तथा ब्रश करने, नहाने जैसे नियमित कामों को भी टालने लगते हैं। ऐसे लोगों की चाल में लड़खडा़हट, बोलने में तुतलाहट अथवा हकलाहट आ जाना आम बात है। इनके लती लोगों की निद्रा में अनियमितता, भूख कम लगना, आंखों का लाल हो जाना, आंखे बुझी सी रहना, आंखों के नीचे सूजन व आंख की पुतली सुंई की नोक की तरह सिकूड जाना जैसे लक्षण आमतौर से देखे जाते हैं।

नशे की गिरफ्त में आने वाले लोगों के स्‍वभाव में अचानक परिवर्तन आ जाता है। बात-बात पर झूठ बोलना, उधार लेना, चोरी करना व आसामाजिक गतिविधियों में लिप्‍त हो जाना, वाहन चलाते समय बार-बार दुर्घटना होना, पुराने दोस्तों के साथ समय न बिताना, नये-नये मित्रों का निश्चित समय पर घर आना, अधिक खर्च की मांग व पैसा नहीं मिलने पर उत्‍तेजित व आक्रामक हो जाना, शयन कक्ष अथवा स्‍नानघर में इंजेक्शन की खाली सिरिंज, सिगरेट के ऊपर वाली एल्‍यूमिनियम की पतली कागज जैसी फाइल, पतली प्‍लास्टिक की पाइप व धुंये के काले निशान वाले सिक्‍के का मिलना, घर से कीमती सामान गायब होने जैसी घटनाएं भी नशे की लती लोगों के साथ आमतौर से देखी जाती हैं।  

नशीली दवाओं के नुकसान

 

ऐसे लोगों का प्रतिशत काफी अधिक है, जो मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए नशीली दवाएं लेते हैं। उनके सेवन से प्रारम्‍भ में तो राहत सी महसूस होती है, लेकिन अंत बेहद बुरा होता है। एक ओर जहां ऐसे लोग अनेक शारीरिक व्‍याधियों के शिकार हो जाते हैं, वही हिंसा और गुनाह की प्रवृत्ति के चपेट में आने से स्‍वयं को तथा परिवार को संकट में डाल देते हैं।

 

नशीली दवा के रूप में बेहद मशहूर हशीश के धुंए में सिगरेट की तुलना में पांच गुना ज़्यादा कार्बन मोनो ऑक्साइड और तीन गुना ज्यादा टार होता है। कार्बन मोनोऑक्साइड बगैर रंग और गंध वाली गैस होती है, जो रोगी की जान भी ले सकती है।

 

कोकेन या क्रेक की आदत डालने के लिए इसका एक बार सेवन भी काफी होता है। इसका जरूरत से ज़्यादा डोज लेने पर हार्ट अटैक की आशंका होती है, जिससे व्‍यक्ति की मौत भी हो सकती है।

नशीली दवाओं के सेवन से रोगी को बहुत ही गंभीर किस्म का डीहायड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) हो सकता है। इनके अलावा इसके सेवन से किडनी की बीमारी या अवसाद (Depression) भी होता है।

नशीली दवाएं रोगी के निर्णय लेने की क्षमता पर असर डालती हैं। इसकी वजह से रोगी असुरक्षित सेक्स संबंध बनाने का ज़ोखिम उठा लेते हैं, जिससे एड्स की संभावनाएं भी बढ़ती जाती हैं।

 

 

अगर आपका बच्‍चा ड्रग एडिक्‍ट है...

 

अगर आपको ये आशंका है कि आपका बच्चा नशीली दवाओं का सेवन कर रहा है, तो सबसे पहले तो आप नशीली दवाओं, उनके परिणाम और साधनों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी हासिल करें। लेकिन जब तक आपका शक पुख्‍ता न हो, बच्‍चे पर ऐसा बिलकुल जाहिर न होने दें।

सबसे पहले आप अपने बच्‍चे के कमरे और उसके सामान की जांच करें। क्‍योंकि ड्रग का सेवन करने वाले ड्रग्स से जुड़ा सामान अपने बैग, बाथरूम, बेडरूम, दराज या कार में रखते है। इस सामान में कई तरह की चीजें शामिल होती हैं, जैसे- सिगरेट रोलिंग पेपर और रोलिंग व्हील, पाईप हबली–बबली या टूटी बोतल का उपरी हिस्सा, पावडर, गोलियां व पौधे, ऐश ट्रे या पॉकेट में पाउडर, पत्तियां या बीज, फ्लेवर्ड तंबाकू।

यदि आपकी आशंका सही साबित होती है, तो सबसे पहले बच्चे से आपकी शंका के बारे में बात करने की कोशिश करें। लेकिन इसमें बेहद सावधानी की जरूरत है। क्‍योंकि अगर उसे कोई समस्या है, तो वह गुस्सा कर सकता है और क्रोध में कोई खतरनाक कदम उठा सकता है।

अपने बच्चे को ड्रग्स से दूर रखने के लिए सबसे जरूरी यह है कि आप उसके साथ ईमानदारी भरा और अच्छा रवैया अपनाएं। जब आप दूर हों, तो उसके दोस्त, दोस्तों के रहन सहन और आदतों की जानकारी लें और लगातार उनसे संपर्क में रहें। अगर आपको पता चले कि आपका बच्‍चा नशीली दवाओं का सेवन कर रहा है, तो आप नशे की आदत छुड़ाने में लगे संगठनों से सम्‍पर्क करें। उनकी मदद से आप अपने बच्‍चे को आसादी से नशीली दवाओं के चंगुल से मुक्‍त करा सकेंगे।

उपचार -नशा छोड़ने के लिए निम्न उपाय करें :

•डायरी बनायें – नशा कब और कितनी मात्रा में लेते हैं लिखें l
•विचार करें -आपके लिए आपका परिवार,बच्चे ,कैरियर और स्वास्थय कितनी अहमियत रखता है ,आपके नशा करने से इन चीजों पर कितना असर हो रहा है l
•नशा छोड़ने से आपको क्या फायदे और क्या नुकसान होंगे एवं यदि आप नशा जारी रखते हैं तो आपके भविस्य पर क्या असर होगा ,गम्भीरता से विचार करें l 
•पॉजिटिव रहें ,अपने आपको खेल कूद ,किताबें पड़ना,फ़िल्म देखना एवं गाने सुनना जैसी गतिविधियों में व्यस्त रखें ,अकेले ना रहें l
•यदि इतने उपाय करने के बाद भी नशा छोड़ने में सफल न हों तो विशेषज्ञ एवं नशा मुक्ति केंद्र से राय लेना बेहतर होगा l
•नशा छोड़ने के लिए काउंसलिंग लेना चाहिए |

नशा चाहे शराब का हो या ड्रग्स का, लत चाहे जुए की हो या फिर इंटरनेट की, नतीजा एक ही होता है बर्बादी, अपनी और अपनों की बर्बादी। 

यह बुराई आज विश्वव्यापी समस्या बनकर सामने खड़ी है | लगभग सभी देशो ने इस प्रकार की नशीली दवाओ के दुरूपयोग पर रोक लगाई है | इनके विरोध में कानून भी बने है जिनमे कढ़ोर दंड का प्रावधान है | कुछ देशों ने तो इस पर मृत्यु-दंड का भी प्रावधान किया गया है | परन्तु विशेष बात यह है की यह एक सामाजिक बुराई है और किसी भी सामाजिक बुराई को कानून व दंड के बल पर दूर नहीं किया जा सकता है | इस बुराई को समूल रूप से नष्ट करने के हेतु सामाजिक चेतना, जागृति व एकजुट प्रयास की जरुरत है |

मादक पदार्थों की तस्करी और उसके विस्तार से संघर्ष के लिए वर्षों से जारी प्रयासों के बाद विश्व समुदाय को यह समझ में आ गया है कि एक बीमारी के रूप में नशे को स्वीकार किए जाने के दृष्टिगत लोगों को जागरूक करना और लोगों की भागीदारी मादक पदार्थों से संघर्ष के लिए एक बेहतरीन मार्ग हो सकता है। स्पष्ट है कि समाज की नागरिक संस्थाओं विशेषकर पारिवारिक संस्था को नशे, उसके ख़तरों और मादक पदार्थों से होने वाली हानियों और उसके उपचार के लिए जागरूक व संवेदनशील बनाकर प्रभावी भूमिका निभाई जा सकती है।


न्यूज़पेपर में दिया गया जॉब कोड दिए गए    Textbox में दर्ज करे और जॉब सर्च करे



Quick Links